systemhalted by Palak Mathur

अपनी ही तैलाश में हूँ, गैरों कि तरह

अपनी ही तैलाश में हूँ, गैरों कि तरह,
ज़माने के साथ हूँ, बेसहारों कि तरह!
न जाने कब यह ज़िंदगी सुधर जायेगी,
खो गया हूँ यहाँ ख्यालों कि तरह!!

Poetry   Hindi   हिन्दी