systemhalted by Palak Mathur

नाराज़गी

ज़िंदगी से रंजिश है मेरी,
क्यों है न जानता हूँ मैं,
खुशी आती है पल भर के लिए,
बैठती ही नहीं है साथ मेरे,
न जाने किस बात की नाराज़गी है,
न समझ पाता हूँ मैं !!!

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