तन्हाई  
 
चारों और के अंधियारे में

जब मैं छत पर बैठा था अकेला,

दूर तक निहारने कि कोशिश कर रहा था ,

तभी मुझे लगा मेरी आत्मा मुझसे अलग हो

मेरे पास आ बैठी है ,

मेरी तन्हाई में अपने को शामिल करने ,

और शायद कुछ कहने !!

 
 
 
जैसे ही वह हुई कुछ कहने ,

कहीं दूर किसी ने एक दीप जला दिया ,

यह सोच कि सुबह के सूरज कि

पहली किरण आ पड़ी है ,

वह मेरे भीतर समां गयी ,

मुझको वहीं छोड़ ,

मेरी तन्हाई में !!