सिर्फ़ है तेरा आसरा
09 Sep 2008 Share on:
ज़िंदगी से रंजिश है मेरी, क्यों है न जानता हूँ मैं, खुशी आती है पल भर के लिए, बैठती ही नहीं है साथ मेरे, न जाने किस बात की नाराज़गी है, न समझ पाता हूँ मैं!
ज़िंदगी से रंजिश है मेरी, क्यों है न जानता हूँ मैं, खुशी आती है पल भर के लिए, बैठती ही नहीं है साथ मेरे, न जाने किस बात की नाराज़गी है, न समझ पाता हूँ मैं!