आँखें बिछाए बैठे हैं इंतज़ार में उनके,
ग़म-ए-उल्फ़त का हमें पहले गुमान न था!
वो मिल जाएँगे सर-ए-राह चलते-चलते,
दूर रहेंगे मगर ये गुमान न था!!!