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होली
एक कविता होली के अव्सर पर! लिखे हुए तो काफ़ी समय हो गया, कई साल बीत गए हैं पर दिल में हर साल यही कामना रहती है।
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तन्हाई
यह कविता मैने १७ मार्च २००२ को आगरा में खतैना रोड वाले घर में लिखी थी तकरीबन रात को १:२५ बजे।
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जिंदगी क्या चीज़ होती है?
A poem written while in College.
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तमसो मा ज्योतिर्गमय
A poem written while at Agra.