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शिकवा नहीं है अब उससे
रोज़ अपनी ही तैलाश में निकलता हूँ सवेरे, पर अपने आप को न पा पता हूँ, जिंदगी भी अब परेशान है मुझसे, शिकवा नहीं है अब उससे।
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अपनी ही तैलाश में हूँ, गैरों कि तरह
अपनी ही तैलाश में हूँ, गैरों कि तरह, ज़माने के साथ हूँ, बेसहारों कि तरह! न जाने कब यह ज़िंदगी सुधर जायेगी, खो गया हूँ यहाँ ख्यालों कि तरह!!
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अपनी तलाश में
आज सुबह से ही मन उदास है। पता नहीं क्यों लेकिन है . कभी - कभी सोचता हूँ कि आदमी कितना विचित्र होता है, बिना किसी कारण ही परेशान और उदास हो जाता है। समझने कि कोशिश कर रहा हूँ अपने आप को। पता नहीं कब समझ पाऊंगा। इंतज़ार कर रहा हूँ उस क्षण का जब मैं अपने को समझ पाऊंगा और एक यायावर मेघ खंड कि तरह इस ...
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आज ज़माने से हार चूका हूँ मैं
आज ज़माने से हार चूका हूँ मैं, जिससे करता हूँ प्यार ना पा सका हूँ मैं, वोह संगदिल हसीना पास ही थी मेरे, पर उससे बहुत दूर जा चूका हूँ मैं!!
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Optimist or Pessimist!!
I am optimistically pessimist!!
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Agra in News
So Agra was in news and that too because of our college… Anand Engineering College. And there is nothing to cheer about. It was all for bad reasons.
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Future of Engineers
Read this article on Wordpress. Agree with most of the things said. It is true that all engineers out of college look forward to get a Software job in companies like Infosys, TCS, Wipro, Cognizant and all not because they are crazy about software programming or want to make thousands of money e...
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जिंदगी क्या चीज़ होती है ?
रात थी , बारह बज रहे थे , सिर्फ अँधियारा था चारों ओर,